
हमारा कर्त्तव्य भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वेदों की रक्षा करना है





















“संस्कृति से सभ्यता, और वेदों से जीवन का ज्ञान” यही मूल भावना है जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् की, यह पवित्र संस्थान वैदिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति, और आध्यात्मिक मूल्यों के पुनरुत्थान के उद्देश्य से स्थापित किया गया है, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् देवपहाड़ी मठ जहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबें नहीं बल्कि संस्कार, धर्म और सेवा एवं 200 साल पुरानी परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम भी है। गुरुकुल में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वेद, उपनिषद्, गीता, संस्कृत, ज्योतिष, योग, आयुर्वेद और दर्शनशास्त्र का गहन अध्ययन कराया जाता है। गुरुकुल का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक, अनुशासित और प्रेरणादायक है, जहाँ विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान दिया जाता है, बल्कि संस्कार, चरित्र और आत्मबल का भी विकास किया जाता है। यहाँ के आचार्य और संतजन विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परंपरा की भावना से शिक्षा प्रदान करते हैं। गुरुकुल में दैनिक हवन, ध्यान, भजन-कीर्तन, वेदपाठ एवं योगाभ्यास जैसी दिनचर्याएँ विद्यार्थियों के जीवन में शुद्धता और अनुशासन का संचार करती हैं।

यह एक गुरुकुल है जो वैदिक ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, योग, अध्यात्म और आधुनिक शिक्षा भी प्रदान करता है।
सेवा, सदाचार और भक्ति की भावना का विकास।

असहाय और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है।
आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वेद, पुराण और संस्कृति का भी ज्ञान दिया जाता है।

विद्यार्थियों को प्रतिदिन शुद्ध, पौष्टिक और सात्त्विक भोजन प्रदान किया जाता है।
संतुलित आहार और स्वास्थ्य सेवाएँ विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क औषधि और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध है।

हर सहयोगी को गुरुकुलम् के इस पुण्य प्रयास में दानदाता एवं सह-सेवक के रूप में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान किया जाता है।।
हमारा लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के स्वास्थ्य, संस्कार और सम्पूर्ण विकास की रक्षा करना है।
“🧘♀️जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है, संस्कार और सेवा के माध्यम से चरित्रवान, आत्मनिर्भर और संस्कृतिमय भारत का निर्माण, इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु गुरुकुलम् में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है,बल्कि आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक और जीवनोपयोगी मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है, गुरुकुलम् का लक्ष्य समस्त मानवता में यह भावना जगाना है कि “संपूर्ण विश्व एक परिवार है।” यह प्रेम, करुणा, एकता और विश्वशांति के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
गुरुकुलम् में विद्यार्थियों को वेद, उपनिषद, गीता, पुराण और संस्कृत व्याकरण की शिक्षा दी जाती है। साथ ही आधुनिक विषयों जैसे गणित, विज्ञान, इतिहास, और कंप्यूटर का भी अध्ययन कराया जाता है।
यहाँ विद्यार्थियों को संस्कारों, सदाचार, सेवा भावना और गुरु भक्ति का प्रशिक्षण दिया जाता है। नियमित रूप से यज्ञ, संस्कार समारोह, संगीतमय प्रवचन और सत्संग आयोजित किए जाते हैं।
त्योहारों, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता। भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से आत्मबल का विकास।
गुरुकुलम् के इस महान कार्य में समाज के सभी वर्गों से सहयोग अपेक्षित है। आपका दान, सहयोग या समय किसी असहाय बालक के जीवन को नया प्रकाश दे सकता है। “सेवा का एक अंश भी परमात्मा की आराधना के समान है।”
