
हमारा कर्त्तव्य भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वेदों की रक्षा करना है





















“जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम्” किसी एक व्यक्ति या स्थान का नाम नहीं है, बल्कि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य एक महान दार्शनिक थे, और बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् एक धार्मिक और शैक्षिक संस्थान है, जो वैदिक शिक्षा प्रदान करता है। यह गुरुकुल झारखंड के गिरीडीह में देवपहाड़ी मठ से जुड़ा है और इसका उद्देश्य संस्कार, धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी देना है, जिसमें वैदिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जाता है।
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य 8वीं सदी के एक भारतीय वैदिक विद्वान, दार्शनिक और अद्वैत वेदांत के शिक्षक थे, जिन्होंने हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया और इसे एकीकृत किया उन्होंने वेदों और उपनिषदों पर भाष्य लिखे, चार प्रमुख मठ स्थापित किए, और अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रतिपादन किया है।
बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् एक धार्मिक और शैक्षिक संस्थान है, जो वैदिक शिक्षा प्रदान करता है। यह गुरुकुल झारखंड के गिरीडीह में देवपहाड़ी मठ से जुड़ा है और इसका उद्देश्य संस्कार, धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी देना है, जिसमें वैदिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जाता है।
हमारी संस्था “जय बाबा जगनाथ धाम सेवा समिति फाउन्डेशन’ विगत कई वर्षो से सनातन संस्कृति को बढ़ाने हेतु गुरुकुल शिक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग के रोकथाम हेतु, स्वछता मिशन, असहाय जन को शिक्षा-ओोजन आदि उपलब्ध करने हेतु, अन्य सामाजिक एवं धार्मिक कार्य क्षेत्रों में सामाजिक उत्थान एवं जन कल्याण हेतु निःशुल्क सेवा सार्थक रूप से करती आ रही है।
संस्थापक – जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् एवं जय बाबा जगन्नाथ धाम सेवा समिति फाउंडेशन
भारत की सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा और गौ-सेवा के पुनर्जागरण के लिए समर्पित संत पुरुषों में ब्रह्मचारी श्री गौरवानंद महाराज जी का नाम विशेष श्रद्धा और आदर से लिया जाता है। आप न केवल एक तपस्वी एवं विद्वान संत हैं, बल्कि आध्यात्मिकता, सेवा और संस्कृति के संगम का जीवंत प्रतीक हैं।

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बाल संस्कार केन्द्र

फॉलोअर्स

श्री गौरवानंद महाराज जी ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारतीय संस्कृति के उत्थान, वेद-पुराण के प्रचार, और मानवता की सेवा को समर्पित किया है।
ब्रह्मचारी श्री गौरवानंद महाराज जी आज के युग में उस दिव्य चेतना के प्रतीक हैं जो “वेदांत को व्यवहार में” और “भक्ति को सेवा में” परिवर्तित कर रही है। आपके मार्गदर्शन में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् और जय बाबा जगन्नाथ धाम सेवा समिति फाउंडेशन समाज में धर्म, संस्कृति और आत्मबल का दीपक जलाए हुए हैं।
🕉️ “सेवा में ही साधना है, संस्कार में ही सत्य है, और सनातन में ही शक्ति है।”
— ब्रह्मचारी श्री गौरवानंद महाराज जी

आध्यात्मिक क्षेत्र के साथ-साथ परम पूज्य स्वामी गौरवानन्द जी महाराज समाज सेवा को भी अपना धर्म और कर्तव्य मानते हैं।
ब्रह्मचारी श्री गौरवानंद महाराज जी ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारतीय संस्कृति के उत्थान, वेद-पुराण के प्रचार, और मानवता की सेवा को समर्पित किया है।
आपके मार्गदर्शन में स्थापित संस्थान —
“जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम्” तथा
“जय बाबा जगन्नाथ धाम सेवा समिति फाउंडेशन”
आज समाज में धर्म, शिक्षा और सेवा का दीपक प्रज्वलित कर रहे हैं।

गुरुकुल की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वेदों, उपनिषदों और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण करना।
“संस्कृति से सभ्यता, और वेदों से जीवन का ज्ञान” — यही मूल भावना है जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् की, यह पवित्र संस्थान वैदिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति, और आध्यात्मिक मूल्यों के पुनरुत्थान के उद्देश्य से स्थापित किया गया है, ✨ जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् देवपहाड़ी मठ ✨ जहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबें नहीं बल्कि संस्कार, धर्म और सेवा एवं 200 साल पुरानी परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम भी है। गुरुकुल में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वेद, उपनिषद्, गीता, संस्कृत, ज्योतिष, योग, आयुर्वेद और दर्शनशास्त्र का गहन अध्ययन कराया जाता है। गुरुकुल का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक, अनुशासित और प्रेरणादायक है, जहाँ विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान दिया जाता है, बल्कि संस्कार, चरित्र और आत्मबल का भी विकास किया जाता है। यहाँ के आचार्य और संतजन विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परंपरा की भावना से शिक्षा प्रदान करते हैं। गुरुकुल में दैनिक हवन, ध्यान, भजन-कीर्तन, वेदपाठ एवं योगाभ्यास जैसी दिनचर्याएँ विद्यार्थियों के जीवन में शुद्धता और अनुशासन का संचार करती हैं।
बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् की स्थापना का मुख्य उद्देश्य — यह एक गुरुकुल है जो वैदिक ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, योग, अध्यात्म और आधुनिक शिक्षा भी प्रदान करता है, यह गिरीडीह, झारखंड में स्थित देवपहाड़ी मठ से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य प्राचीन वैदिक ज्ञान को पुनर्जीवित करना और भविष्य के आचार्यों (शिक्षकों) का पोषण करना है।
“वेदों, उपनिषदों और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण करना एवं भारत की महान वैदिक परंपरा को पुनः जन-जन तक पहुँचाना और संस्कृति को शिक्षा के माध्यम से जीवन में उतारना” यहाँ विद्यार्थियों को संस्कृत, वेद, दर्शन, योग, ज्योतिष, आयुर्वेद और भक्ति मार्ग की शिक्षा दी जाती है।गुरुकुल का प्रत्येक शिष्य केवल शिक्षित नहीं, बल्कि संस्कारवान, अनुशासित और आत्मनिष्ठ बनकर समाज में आध्यात्मिक प्रकाश फैलाने वाला बनता है।
महाराज जी के मार्गदर्शन में गुरुकुल प्रणाली को पुनः जीवंत किया गया है। यहाँ बच्चों को न केवल आधुनिक शिक्षा दी जाती है, बल्कि वेद, उपनिषद्, संस्कृत, योग, ध्यान और भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन कराया जाता है।
भारत की सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा और लोककल्याण के महान उद्देश्य से प्रेरित एक पवित्र संस्था है — “जय बाबा जगन्नाथ धाम सेवा समिति फाउंडेशन” इस संस्था के संस्थापक एवं प्रेरणा स्रोत ब्रह्मचारी श्री गौरवानंद महाराज जी हैं, जिन्होंने अपने तप, साधना और सेवा भाव से समाज में धर्म, संस्कृति और मानवता का प्रकाश फैलाया है।

महाराज जी के मार्गदर्शन में गुरुकुल प्रणाली को पुनः जीवंत किया गया है। यहाँ बच्चों को न केवल आधुनिक शिक्षा दी जाती है, बल्कि वेद, उपनिषद्, संस्कृत, योग, ध्यान और भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन कराया जाता है।

संस्था का प्रत्येक कार्य निःशुल्क और समाज कल्याण की भावना से प्रेरित है।

संस्था प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग और संरक्षण के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है।






























महाराज श्री का विशेष लगाव गौमाता से है। आपके सान्निध्य में संचालित “गौरी-शंकर गौशाला” न केवल एक आश्रयस्थल है, बल्कि सेवा, संरक्षण और संवर्धन का केंद्र भी है, यहाँ सैकड़ों गौमाताओं की सेवा की जाती है, उनका स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखी जाती है। महाराज जी का मानना है —
“गौ सेवा केवल धर्म नहीं, यह राष्ट्र सेवा का सबसे पवित्र रूप है।”







कार्यक्रम: भव्य भूमि पूजन समारोह
समय: सायं 4 बजे
विशेष विवरण: 1 दिवसीय
कार्यक्रम: कलश यात्रा एवं श्री राम कथा,
समय: प्रातः 07 बजे
विशेष विवरण: प्रतिदिन संध्या में कथा प्रवचन- 9 दिवसीय
कार्यक्रम: महाशिवरात्रि : शिव जी की बारात एवं नगर भ्रमण
समय: प्रातः 07 बजे
विशेष विवरण: संध्या में कथा प्रवचन
कार्यक्रम: राम नवमी गुरुवार,
समय: प्रातः 07 बजे
विशेष विवरण: संध्या में कथा प्रवचन
कार्यक्रम: भजन संध्या
समय: सायं 7 बजे
विशेष विवरण: संगीतमयी भजन संकीर्तन
कार्यक्रम: कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार,
समय: प्रातः 07 बजे
विशेष विवरण: संध्या में भजन कीर्तन
कार्यक्रम: सांस्कृतिक भक्ति महोत्सव
समय: पूर्ण दिवस
विशेष विवरण: विशेष भजन, प्रवचन और सेवा कार्यक्रम
“जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम् एवं जय बाबा जगन्नाथ धाम सेवा समिति फाउंडेशन” इस संस्था के संस्थापक एवं प्रेरणा स्रोत ब्रह्मचारी श्री गौरवानंद महाराज जी हैं, जो अपने तप, साधना, त्याग और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से समाज में जनकल्याण, मानवता और धर्म-संवर्धन की भावना को जीवित रखे हुए हैं, इनके द्वारा आयोजित विविध कार्यक्रमों, यज्ञों, सेवा-प्रयासों और सांस्कृतिक आयोजनों का संक्षिप्त विवरण हमारे ब्लॉग के माध्यम से विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस दिव्य मिशन से जुड़कर धर्म, संस्कृति और सेवा के मार्ग पर प्रेरित हो सकें।















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